अशोक प्रियदर्शी

ग्यारह साल पहले की बात है। बिहार के नवादा जिले के नारदीगंज थाना के ननौरा पंचायत के तिलकचक गांव निवासी रामजी चैहान के पांच वर्षीय पुत्र मिथुन के गाल पर फूंसी हो गया था। फूंसी के दर्द से मिथुन काफी परेशान था। रामजी चैहान ने पड़ोसी गांव गोतराईन के एक ग्रामीण प्रैक्टिशनर से इलाज कराया। उस ग्रामीण प्रैक्टिशनर ने मिथुन को दो दवाएं दी थी। तीन दिन तक खिलाने के लिए कहा था। उन तीन दिनों के अंतराल में मिथुन का चेहरा विकृत हो गया। पूरा शरीर लाल हो गया। ग्रामीणों ने बताया कि मिथुन को माताजी हो गया है। कुछ दिनों तक ठीक होने का इंतजार किया गया। झार फूंक कराया। फिर भी स्वस्थ्य नही हुआ।

उसके बाद मिथुन के पिता ने नवादा सदर अस्पताल में दिखाया। तब चिकित्सक ने बताया कि दवा रियेक्शन कर गया है। इसके चलते ऐसी हालत हुई है। उसके बाद काफी दिनों तक इलाज कराया, फिर भी ठीक नही हुआ। दिनों दिन शरीर और भी भयावह हो गया। अब उसकी हालत इतनी भयावह है कि उसे देखते ही लोगांे के रेंगटे खड़े हो जाते हैं। बड़े तो धीरे धीरे अभ्यस्त हो गए हैं। लेकिन बच्चे सामने आने से डरते हैं। छोटे बच्चे तो चिल्लाने लगते हैं। रात में मिथुन का घर से बाहर निकलना दुश्वार है। रात में अचानक मिथुन का चेहरा देखते ही कई लोग भूत मानकर डर गए हैं। लिहाजा, परिवार के लोग अब रात में मिथुन को घर से नही निकलने देते हैं। मिथुन अपना चेहरा भी आइने में देखने से डरता है। मिथुन ठीक से बोल भी नही पाता है
मिथुन का दाखिला कराने गए पिता तब उन्हें निराश लौटना पड़ा
16 वर्षीय मिथुन जब आठ साल का था तब उसके पिता ने गांव के प्राइमरी स्कूल में दाखिला के लिए ले गए थे। लेकिन मिथुन को देखते ही स्कूल के बच्चे चिल्लाने लगे। भूत-भूत कहने लगे। लिहाजा, स्कूल टीचर ने दाखिला लेने में लाचारी व्यक्त किया। लिहाजा, दोनों वापस लौट आए। उसके बाद से मिथुन की पढ़ाई का रास्ता भी बंद हो गया। मिथुन ज्यादातर घर में रहता है। मिथुन बताते हैं कि बचपन में जो उनके साथ खेला करते थे आज वह उन्हें देखकर भागते हैं। वह डरते हैं। वह कहता है कि वह घुटन और तकलीफदेह जीवन जीने को बाध्य है। घर में मन नही लगता है तब खेतों की तरफ बकरी चराने के लिए निकल जाते हैं।
परिवारिक पृष्ठभूमि
तिलकचक निवासी रामजी चैहान के पांच बेटे मनोज, जितेन्द्र, दीपा, मिथुन, आजाद कुमार हैं। चार भाई ठीक है। लेकिन मिथुन की हालत दयनीय बनी है। वैसे काफी प्रयास के बाद मिथुन को 11 जनवरी 2015 को विकलांग सर्टिफिकेट बना। लेकिन अबतक किसी तरह की राशि नही मिली है। मिथुन को अन्य सरकारी मदद भी नही मिला है। मिथुन के पिता भी बीपीएल परिवार में हैं। लेकिन इस परिवार को भी आवास आदि की सुविधा नही मिली है। प्रत्येक माह राशन किरासन भी नही मिल पाता है। रामजी चैहान कहते हैं कि अपनी क्षमता के मुताबिक मिथुन का नवादा के अलावा गया और पटना के अस्पतालों में इलाज कराया लेकिन ठीक नही हुआ। बड़े अस्पतालों में जाने की क्षमता नही है। उनके पास सिर्फ दस कटठा जमीन है। मजदूरी से जीवन चलता है।
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